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Showing posts from December, 2020

मैं satendra kumar sharma P S KHAJWA 121 RAIPUR K REWA M.P. से हूँ । 3 से 4 साल के बच्चे और 4 से 5 साल के बच्चे खेल के माध्यम से या छोटी वस्तुओं के माध्यम से जैसे चॉकलेट, गोली, या आंटी के माध्यम से समूह में बैठकर संख्यात्मक ज्ञान और बच्चों के परिवार के सदस्यों के नाम बता कर अक्षर संबंधी ज्ञान कराया जा सकता है ।

मैं satendra kumar sharma P S KHAJWA 121 RAIPUR K REWA M.P. से हूँ।बचपन मे एक कविता-मै गांधी बनजाऊगा।चल रे मडके टमक टुँ कक्षा -2-3मै सबको सुना ता था। स्कूल मे जब निरीक्षण मे मुझे पुरस्कार भी मिले । ओर थोडी सी त्रुटि पर सुताई भी बहुत होती थी।

मैं satendra kumar sharma P S KHAJWA 121 RAIPUR K REWA M.P. से हूँ । वर्तमान परिस्थितियों में रेडियो द्वारा, टी.वी. कार्यक्रमों द्वारा, इंटरनेट के माध्यम से, मोहल्ला कक्षा , बच्चों को उनकी सुविधा अनुसार शिक्षण की सुविधा आदि के द्वारा नवाचार किये जा सकते हैं और भी इस ओर प्रयास निरन्तर जारी रहना चाहिए।

मैं satendra kumar sharma P S KHAJWA 121 RAIPUR K REWA M.P. से हूँ । समग्र शिक्षा के सांस्कृतिक और पर्यावरणीय पहलू के अंतर्गत हम नवाचार के रूप में प्रत्येक त्रैमासिक रूप से अंतर -जिला भ्रमण का आयोजन करेंगे ,जिसमें उस त्रेमास में आने वाले उत्सव के बारे में विभिन्न प्रतियोगिताएं जैसे चित्र, रंगोली ,उत्सव मनाना आदि शामिल हो। इस कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग कर समस्त विद्यालयों में इसका प्रसारण हो। इससे दोनों जिलों के विद्यार्थी परस्पर अपनी-अपनी संस्कृति खेल ,भाषा आदि का आदान प्रदान कर सकेंगे और पर्यावरण संबंधी जागरूकता भी बढ़ेगी।

मैं satendra kumar sharma P S KHAJWA 121 RAIPUR K REWA M.P. से हूँ। विद्यालय नेतृत्व के लिए चार लक्ष्यों को प्राप्त करना जरूरी है। (1)विद्यालय का रखरखाव, (2)सीखने का अवसर प्रदान करना, (3)नवाचार के लिए प्रेरित करना और(4) आवश्यकता एवं आकांक्षाओं की पूर्ति करना। कक्षा में अधिगम में विद्यालय नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विद्यालय नेतृत्व सीधे छात्र अधिगम में भाग ले सकता अथवा विद्यालय नेतृत्व शिक्षकों को प्रेरित करें और फिर शिक्षक छात्रों को अधिगम कराएं।

मैं satendra kumar sharma P S KHAJWA 121 RAIPUR K REWA M.P. से हूँ । एक कुशल नेतृत्व कर्ता में समय की पाबंदी सभी को साथ लेकर चलना सर्वांगीण विकास उपलब्ध संसाधनों का समायोजन, प्रत्येक बच्चे तक संपूर्ण शिक्षा का पहुंचाना, सभी के साथ समान व्यवहार पाठशाला के साथ-साथ सामाजिक संबंध एवं सकारात्मक दृष्टिकोण, कार्यों में निपुणता चाहे वह प्रशासनिक हो या पाठ्यक्रम पाठ्यचर्या से संबंधित हो।

मैं satendra kumar sharma (P S KHAJWA 121 RAIPUR K REWA (M.P.) )से हूँ । ऐतिहासिक इमारतें- मोबाइल पत्र-पत्रिकाओं या समाचार पत्रों से देश की ऐतिहासिक इमारतों के चित्र एकत्र करना पाठ्यपुस्तक आधारित और भी कुछ महत्वपूर्ण समूह-आधारित परियोजनाएं,शिक्षणार्थियो को स्वविवेक का प्रयोग करते हुए सीखने का खुला अवसर प्रदान करती हैं। छात्रों के परियोजना कार्य के दौरान शिक्षक उनके कार्यों का आकलन करते हुए उनका सहाय होना आवश्यक है।

मैं satendra kumar sharma P S KHAJWA 121 RAIPUR K REWA M.P. से हूँ। अवलोकन कौशल का विकास करती है। छात्रों के ज्ञान में वृद्धि और जिज्ञासा उत्पन्न करती है। हम उनसे अभ्यास के लिए इस प्रकार के प्रश्न भी पूछ सकते है ।

मैं satendra kumar sharma (P S KHAJWA 121 RAIPUR K REWA M.P) से हूँ। जेंडर भेद सामाजिक है ,जैविक रूप से सभी समान है| शारीरिक, भावनात्मक और मनोपरक समानता मेल ,फीमेल औरथर्ड जेंडर तीनो मे है अत:कक्षा में पाठ्यपुस्तक कीगतिविधियॉ करने के अवसर सभी को समान ता व समतापूर्वक उपलब्ध करांयगे| समाज में व्याप्त लैंगिक असमानता के भेदभाव को समाप्त करने या कम करने के प्रयास हमें सतत रूप से करते रहना चाहिए ।बच्चों को इस बारे में हमेशा शिक्षा देते रहना चाहिए ।जब भी अनजान लोग भी कई तरह का कार्य कर सकते हैं ।जैसे खेल कूद, डॉक्टर ,वैज्ञानिक आदि का कार्य दिव्यांग व्यक्ति कर सकते हैं ।अत: उन्हे नजर अंदाज नहीं करना चाहिए ।उन्हें पढ़ाने हेतु कक्षा में भी कई व्यवस्थाएं की जा सकती हैं ।बच्चों की जानकारी देते रहना चाहिए स्कूलों में भी उन्हे पढ़ाने के लिए हम विशेष त्यवस्थाएं कर सकते हैं ।

मैं satendra kumar sharma (P S KHAJWA 121 RAIPUR K REWA M.P.) से हूँ। नोटबुक सर्वेक्षण के अंतर्गत हम पशुओं का सर्वेक्षण शौचालयों का सर्वेक्षण किलोमीटर दूर आसपास के धार्मिक एवं एतिहासिक स्थानों की जानकारी एकत्रित करवा कर उनके बारे में शाला में सामूहिक चर्चा करके उनको परिवेस की जानकारी आसानी से दी जा सकती है।

मैं satendra kumar sharma (p s khajwa 121 raipur k rewa m. p. ) से हूँ।हम इतिहास की जिस भी अवधि के बारे मैं जानना चाहते हैं उस समय की प्रमुख पुस्तके, ऐतिहासिक चित्र, पाषाण, हस्तकला सामग्री, औजार, मुद्राएं , सामग्री संग्रहित कर वातावरण का ज्ञान व समझ विकसित कर सकेंगे।